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उन तमाम गुरूओं को समर्पित जिन्होंने मुझे ज्ञान दिया.

Thursday, March 19, 2009

सिफ़त

महेंद्रभटनागर

.
यह
आदमी है —
हर मुसीबत
झेल लेता है!
विरोधी आँधियों के
दृढ़ प्रहारों से,
विकट विपरीत धारों से
निडर बन
खेल लेता है!
.
उसका वेगवान् अति
गतिशील जीवन-रथ
कभी रुकता नही,
चाहे कहीं धँस जाय या फँस जाय;
अपने
बुद्धि-बल से / बाहु-बल से
वह बिना हारे-थके
अविलम्ब पार धकेल लेता है!
.
यह
आदमी है / संयमी है
आफ़तें सब झेल लेता है!

1 comments:

श्यामल सुमन March 19, 2009 at 7:26 AM  

बिल्कुल ठीक। कहते हैं कि-

मेरी जिन्दगी एक मुसलसल सफर है।
जो मंजिल पे पहुँचे तो मंजिल बढ़ा दी।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

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