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उन तमाम गुरूओं को समर्पित जिन्होंने मुझे ज्ञान दिया.

Wednesday, February 11, 2009

नारी चेतना

नगमा जावेद

मैं -
अपने खोये हुए ख्वाबों को
ढूंढ रही हूं -
वो ख्वाब, जो मुझे
ये एहसास देंगे
कि
मैंने तुम्हारे
संगदिल हाथों से
अपने हिस्से की की धूप
छीन ली है।

4 comments:

Shamikh Faraz February 14, 2009 at 6:39 AM  

nagma ji kafi khubsurat likha.

अमिताभ श्रीवास्तव February 22, 2009 at 6:38 PM  

waah, naari chetna aour naari adhikaar ki baat khvabo ke jariye...
achcha likha he aapne..

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