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उन तमाम गुरूओं को समर्पित जिन्होंने मुझे ज्ञान दिया.

Tuesday, January 6, 2009

वेदना का वृक्ष

SEEMA GUPTA


विद्रोह कर आंसुओ ने,
नैनो मे ढलने से इंकार किया
ओर सिसकियाँ भी
कंठ को अवरुद्ध करके सो गयी
स्वर का भी मार्गदर्शन
शब्दों ने किया नही
भाव भंगिमाएं भी रूठ कर
लुप्त कहीं हो गयी
अनुभूतियों का स्पंदन भी
तपस्या में विलीन हुआ
वेदना के वृक्ष की ऊँचाइयों को
स्पर्श दिल ने जब किया .......

3 comments:

seema gupta January 6, 2009 at 4:03 PM  

शगुफ्ता नियाज़ ji thanks a lot for presenting my poem here.

regards

मोहन वशिष्‍ठ January 6, 2009 at 7:10 PM  

विद्रोह कर आंसुओ ने,
नैनो मे ढलने से इंकार किया
ओर सिसकियाँ भी
कंठ को अवरुद्ध करके सो गयी

दिल को छू गई बेहतरीन कविता बारम्‍बार बधाई

bhoothnath(नहीं भाई राजीव थेपडा) January 8, 2009 at 12:21 AM  

और क्या कहूँ.........आपके ब्लॉग पर ही कह दिया.........!!

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