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उन तमाम गुरूओं को समर्पित जिन्होंने मुझे ज्ञान दिया.

Wednesday, November 26, 2008

एक शाम और ढली

SEEMA GUPTA

राह पे टकटकी लगाये ..
अपने उदास आंचल मे
सिली हवा के झोकें ,
धुप मे सीके कुछ पल ,
सुरज की मद्धम पडती किरणे,
रंग बदलते नभ की लाली ,
सूनेपन का कोहरा ,
मौन की बदहवासी ,
तृष्णा की व्याकुलता,
अलसाई पडती सांसों से ..
उल्जती खीजती ,
तेरे आहट की उम्मीद ,
समेटे एक शाम और ढली ....

2 comments:

Vijay Kumar Sappatti November 26, 2008 at 4:41 PM  

bahut khoob , kya baat hai , saare ke saare happenings ko ek aahat ke intjaar mein la kar khatm kiye

wah seema bahut khub .

very good.

regards

vijay
B : http://poemsofvijay.blogspot.com

seema gupta November 27, 2008 at 10:22 AM  

DR.Shagufta Niyaz jeee thanks a lot for presenting my poem here.

Regards

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