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उन तमाम गुरूओं को समर्पित जिन्होंने मुझे ज्ञान दिया.

Tuesday, November 25, 2008

आंसू

VIJAY KUMAR SAPPATTI

उस दिन जब मैंने तुम्हारा हाथ पकड़ा ,
तो तुमने कहा..... नही..
और चंद आंसू जो तुम्हारी आँखों से गिरे..
उन्होंने भी कुछ नही कहा... न तो नही ... न तो हाँ ..
अगर आंसुओं कि जुबान होती तो ..
सच झूठ का पता चल जाता ..
जिंदगी बड़ी है .. या प्यार ..इसका फैसला हो जाता...

6 comments:

seema gupta November 25, 2008 at 9:43 AM  

जिंदगी बड़ी है .. या प्यार ..इसका फैसला हो जाता...
" scah khaa kaash iska faislaa ho pata.. bhut sunder"

Regards

संगीता पुरी November 25, 2008 at 9:51 AM  

अगर आंसुओं कि जुबान होती तो ..
सच झूठ का पता चल जाता ..
जिंदगी बड़ी है .. या प्यार ..इसका फैसला हो जाता...
क्‍या बात कही है।

Udan Tashtari November 25, 2008 at 11:06 AM  

क्या बात है, बहुत खूब!!

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